
वृद्ध हो गया हूँ
बहुत कुछ किया ज़िन्दगी में
बहुत कुछ पाया
सोचता हूँ कि बहुत कुछ भी सीखा है
लेकिन सब से ज़रूरी बातें
शायद नहीं सीख पाया
ग़ुस्से पर क़ाबू,
क्षमा करना,
बिना शर्तों के प्यार ..........
और भी ऎसी ही
न जाने कितनी छोटी छोटी बातें -
जो सब से ज़रूरी बातें थीं ..
वही नहीं सीख पाया !!
इंतेक़ामन जीने का नशा भी क्या नशा है !!




23 comments:
आज तो आपने दर्पण दिखा दिया अमिताभ जी !
सच ! वही नहीं सीखा..........जो सबसे ज़रूरी था......
इन्तेकामन जीने वाले जब समझेंगे एह्तरामन जीने की अदा ........... तब आएगा जीने का असली मज़ा
Sab se zarooree baat,jo sab se pahle seekhnee chahiye,ham wahee nahee seekhte! Kitna sach kaha aapne!
बहुत अच्छी प्रस्तुति ..
विचारणीय पोस्ट आपका आभार ...
इंतेक़ामन जीने का नशा भी क्या नशा है !!
मेरी पसंदीदा गजलें. इन्हें खूब खूब सुना है. फिर से दिल खुश हो गया...
'उनसे मिलने की तमन्ना है खुदा से पहले...वाह!'
गुज़रे वक़्त को कौन बदल सकता है। वर्तमान बदल जाये इतना ही काफी है।
सबसे जरूरी बातें सीख लेने पर जिन्दगी कहीं गैर जरूरी न लगे .. इसीलिये शायद सबसे जरूरी बात सीखनी बाकी ही रहती है.
बहुत जरूरी बात सीखना तो रह ही जाता है
बहुत जरूरी बात सीखना तो रह ही जाता है
आपकी रचना का जवाब नहीं...और गीत...सुभान अल्लाह...क्या कलेक्शन है...
नीरज
is jeevan ka katuu stya....jo seekha wo jee gaya..jisne nahi seekha wo aaj bhi adhura hai
बहुत सच कहा है..बहुत सुन्दर
आपकी रचना का जवाब नहीं... पहली बार आपके ब्लॉग पर आई हूँ, बहुत अच्छा लगा... आभार
जीवन की आपाधापी कई जरूरी चीज़ें छुड़वा रही है...
ठहराव पर ही यह अहसास होता है...
बेहतर...
REALLY KISSE KANHE
बहुत कुछ किया ज़िन्दगी में
बहुत कुछ पाया
सोचता हूँ कि बहुत कुछ भी सीखा है
लेकिन सब से ज़रूरी बातें
शायद नहीं सीख पाया
ग़ुस्से पर क़ाबू,
क्षमा करना,
बिना शर्तों के प्यार ..........
और भी ऎसी ही
न जाने कितनी छोटी छोटी बातें -
जो सब से ज़रूरी बातें थीं ..
वही नहीं सीख पाया !!
चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 24 - 05 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..
साप्ताहिक काव्य मंच --- चर्चामंच
सबसे जरुरी बात जो थी जीवन में , वही नहीं सीखी ...
हर वक़्त नयी पीढ़ी/पुरानी पीढ़ी को कोसते रहने वाले लोगों के लिए बहुत अच्छा सन्देश ...
सार्थक कविता !
लेकिन सब से ज़रूरी बातें
शायद नहीं सीख पाया
ग़ुस्से पर क़ाबू,
क्षमा करना,
बिना शर्तों के प्यार ..........
aur yahi seekhna hai
सही कहा हम सब सीख लेते है मगर जरूरी बाते ही नही सीखते।
छोटी-छोटी किन्तु बड़ी बातें...कब सीखेंगे हम...ज़िन्दगी फिसल रही है अंजुरी से...
wah.....
जानते हो जिंदगी से क्या सीखा है?अपने भीतर झांकना और अपनी कमियों को यूँ सबके सामने स्वीकार करना.सहज नही ये सब.आपके लिए मन में सम्मान भी पैदा होने लगा है.पहले मात्र एक संगीत प्रेमी के रूप में जानती थी.अच्छे इंसान भी हो .बहुत अच्छा लगा.
जो सीखना था वो ही नही सीखा.' अच्छा किया.
मैंने सीखा.गुस्से पर काबू पाने के बदले में खुद को भीतर ...भीतर ही भीतर .....हा हा हा छोडो.
बिना शर्त प्यार?? अपने ही छलने लगते हैं.कोई परवाह नही करता आपके मन की कि ये भी दुखी होता होगा.सब लाभ उठाना चाहते हैं.
क्षमा करना सीखा तो लोगो ने खूब जख्म दिए.हाँ परिवार को बंधे रखने के लिए,दोस्ती निभाने के लिए ये सब बहुत काम आते हैं.बाबु! इन सबसे मन को असीम शांति मिलती है किन्तु समय से पहले आप दिल के रोगी हो जाते हैं.इसलिए बचे रहो जिन्हें सीख नही पाए उनसे.जी नही पाओगे.हा हा हा
इंतेक़ामन जीने का नशा भी क्या नशा है !!
और तुम पर मर के जीने का नशा भी क्या नशा है..
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