Saturday, April 9, 2011

दीवाना है दीवाना .......













दोस्त गर है तो मेरा साथ दे, अकेला हूँ मैं
वैसे जीने को तो तन्हा भी जिया करता हूँ
और दुश्मन है तो दो चार ज़ख्म ही दे दे
तू जो कोई नहीं क्यों याद तुझे करता हूँ


कोई ज़रूर तो नहीं कि जब कभी भी मुझे
ख्वाब आयें तो उन में तेरा गुज़र भी हो ही
गोया तू मेरे ही इन ख़्वाबों की अमानत है
यूं है नहीं, मैं यूं ही सोच लिया करता हूँ


तुझ को ये इल्म भला हो भी अगर, क्योंकर हो
कि मैं ने ख़्वाबों के कितने ही महल तोड़े हैं
पर तुझे क्या, कि ये हक़ीक़तें तो मेरी हैं
ख्वाब को भी मैं हक़ीक़त शुमार करता हूँ


मुझ से तू आशना है, और बात है ये मगर
आशनाई ये काश मेरे दिल से भी होती
किसी दिन तुझ को कभी इल्म ये भी हो जाता
बग़ैर तेरे मैं न जीता हूँ न मरता हूँ




19 comments:

kshama said...

दोस्त गर है तो मेरा साथ दे, अकेला हूँ मैं
वैसे जीने को तो तन्हा भी जिया करता हूँ
और दुश्मन है तो दो चार ज़ख्म ही दे दे
तू जो कोई नहीं क्यों याद तुझे करता हूँ
Pahlehee stanza ne man moh liya! Nihayat sundar rachana!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

कोई ज़रूर तो नहीं कि जब कभी भी मुझे
ख्वाब आयें तो उन में तेरा गुज़र भी हो ही
गोया तू मेरे ही इन ख़्वाबों की अमानत है
यूं है नहीं, मैं यूं ही सोच लिया करता हूँ


बहुत खूब !

Sunil Kumar said...

पर तुझे क्या, कि ये हक़ीक़तें तो मेरी हैं
ख्वाब को भी मैं हक़ीक़त शुमार करता हूँ
.बहुत सुन्दर अहसास , क्या बात है बहुत खूब ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरती से लिखे एहसास ...

मनोज कुमार said...

खूबसूरत नज़्म।

mukti said...

बहुत अच्छी नज़्म है. ये गाना भी मुझे बहुत पसंद है. फागुन फिल्म का है ना? इस फिल्म के सारे गीत बहुत अच्छे हैं.

mukti said...

और भी ... दीवानों के लिए हक़ीक़त और फ़साने में कोई फर्क नहीं होता. वो तो जीते हैं सपनों में, अगर ना जियें ऐसे तो दुनिया की बेरहमी देखकर मर ही जाएँ.

pratibha said...

तू जो कोई नहीं क्यों याद तुझे करता हूँ...

प्रवीण पाण्डेय said...

यूं है नहीं, मैं यूं ही सोच लिया करता हूँ

गज़ब।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर रचना।

M VERMA said...

बहुत सुन्दर रचना ...

mridula pradhan said...

bahot khoobsurat.......

नीरज गोस्वामी said...

L A J A W A B

Vishal said...

Bohot badiya!!!
कोई ज़रूर तो नहीं कि जब कभी भी मुझे
ख्वाब आयें तो उन में तेरा गुज़र भी हो ही
गोया तू मेरे ही इन ख़्वाबों की अमानत है
यूं है नहीं, मैं यूं ही सोच लिया करता हूँ
Lajawab!!

वाणी गीत said...

खूबसूरत भावाभिव्यक्ति !

Coral said...

दोस्त गर है तो मेरा साथ दे, अकेला हूँ मैं
वैसे जीने को तो तन्हा भी जिया करता हूँ

क्या बात है .....

anupama's sukrity ! said...

किसी दिन तुझ को कभी इल्म ये भी हो जाता
बग़ैर तेरे मैं न जीता हूँ न मरता हूँ

bahut sunder.

ZEAL said...

Lovely lyrics ! Enjoyed listening. Thanks.

सतीश सक्सेना said...

तू जो कोई नहीं क्यों याद तुझे करता हूँ ....

मानव मन को न समझ पाने की व्यथा का अच्छा चित्रण किया है !! शुभकामनायें !!