
दोस्त गर है तो मेरा साथ दे, अकेला हूँ मैं
वैसे जीने को तो तन्हा भी जिया करता हूँ
और दुश्मन है तो दो चार ज़ख्म ही दे दे
तू जो कोई नहीं क्यों याद तुझे करता हूँ
कोई ज़रूर तो नहीं कि जब कभी भी मुझे
ख्वाब आयें तो उन में तेरा गुज़र भी हो ही
गोया तू मेरे ही इन ख़्वाबों की अमानत है
यूं है नहीं, मैं यूं ही सोच लिया करता हूँ
तुझ को ये इल्म भला हो भी अगर, क्योंकर हो
कि मैं ने ख़्वाबों के कितने ही महल तोड़े हैं
पर तुझे क्या, कि ये हक़ीक़तें तो मेरी हैं
ख्वाब को भी मैं हक़ीक़त शुमार करता हूँ
मुझ से तू आशना है, और बात है ये मगर
आशनाई ये काश मेरे दिल से भी होती
किसी दिन तुझ को कभी इल्म ये भी हो जाता
बग़ैर तेरे मैं न जीता हूँ न मरता हूँ




19 comments:
दोस्त गर है तो मेरा साथ दे, अकेला हूँ मैं
वैसे जीने को तो तन्हा भी जिया करता हूँ
और दुश्मन है तो दो चार ज़ख्म ही दे दे
तू जो कोई नहीं क्यों याद तुझे करता हूँ
Pahlehee stanza ne man moh liya! Nihayat sundar rachana!
कोई ज़रूर तो नहीं कि जब कभी भी मुझे
ख्वाब आयें तो उन में तेरा गुज़र भी हो ही
गोया तू मेरे ही इन ख़्वाबों की अमानत है
यूं है नहीं, मैं यूं ही सोच लिया करता हूँ
बहुत खूब !
पर तुझे क्या, कि ये हक़ीक़तें तो मेरी हैं
ख्वाब को भी मैं हक़ीक़त शुमार करता हूँ
.बहुत सुन्दर अहसास , क्या बात है बहुत खूब ...
खूबसूरती से लिखे एहसास ...
खूबसूरत नज़्म।
बहुत अच्छी नज़्म है. ये गाना भी मुझे बहुत पसंद है. फागुन फिल्म का है ना? इस फिल्म के सारे गीत बहुत अच्छे हैं.
और भी ... दीवानों के लिए हक़ीक़त और फ़साने में कोई फर्क नहीं होता. वो तो जीते हैं सपनों में, अगर ना जियें ऐसे तो दुनिया की बेरहमी देखकर मर ही जाएँ.
तू जो कोई नहीं क्यों याद तुझे करता हूँ...
यूं है नहीं, मैं यूं ही सोच लिया करता हूँ
गज़ब।
बहुत सुन्दर रचना।
बहुत सुन्दर रचना ...
bahot khoobsurat.......
L A J A W A B
Bohot badiya!!!
कोई ज़रूर तो नहीं कि जब कभी भी मुझे
ख्वाब आयें तो उन में तेरा गुज़र भी हो ही
गोया तू मेरे ही इन ख़्वाबों की अमानत है
यूं है नहीं, मैं यूं ही सोच लिया करता हूँ
Lajawab!!
खूबसूरत भावाभिव्यक्ति !
दोस्त गर है तो मेरा साथ दे, अकेला हूँ मैं
वैसे जीने को तो तन्हा भी जिया करता हूँ
क्या बात है .....
किसी दिन तुझ को कभी इल्म ये भी हो जाता
बग़ैर तेरे मैं न जीता हूँ न मरता हूँ
bahut sunder.
Lovely lyrics ! Enjoyed listening. Thanks.
तू जो कोई नहीं क्यों याद तुझे करता हूँ ....
मानव मन को न समझ पाने की व्यथा का अच्छा चित्रण किया है !! शुभकामनायें !!
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