Friday, March 4, 2011

नेता आये द्वार ये जीवन धन्य हुआ !!










पश्चिम बंगाल में चुनाव का बाज़ार गर्म हो रहा है .....


हमारे इलाक़े के माननीय नेता हमारे कॉम्प्लेक्स में पधारे.


कितने विनम्र थे .... जिस से मिले सर झुका के ... हाथ जोड़ के मिले.


न जाने क्या क्या सुन रखा था इन महात्मा के बारे में. मेरे मोहल्ले के आस पास ही इन का कार्यक्षेत्र है ... आये दिन सड़क पे इनकी सभाएं होती रहती हैं. दो तीन घंटों के लिए सड़क बंद हो जाती है ..... जनता की तकलीफ़ से इन्हें कोई ख़ास मतलब नहीं होता .... ये तो देश की सेवा में लगे रहते हैं.


लोगों से सुना करता था कि हमारे इलाके में सारे ऑटो वाले, रिक्शा वाले इनके आदमियों को हफ़्ता देते हैं .... न, डर से नहीं, श्रद्धा से ...... इलाके की बेहतरी के लिए.


आज उन्हें देख कर, मिल कर यक़ीन हो गया कि वे कितने सभ्य हैं .... नेता होने के सारे गुण हैं उन में .....


कॉम्प्लेक्स के लोगों ने लाख बुरा-भला कहा उन्हें, लेकिन वे मुस्कुराते रहे .... हाथ जोड़े .... सर झुकाए. इस "सिटी ऑफ जॉय" को स्वर्ग बना देने के वादे किये..... रोजमर्रा की सारी तकलीफों से निजात दिला देने का आश्वासन भी दिया ..... हालांकि लोग कहते रह गए कि आप की बातों पर अब हमें विश्वास नहीं रह गया, लेकिन नेता जी अपनी बात पे बड़ी विनम्रता से टिके रहे. उन्हें, और उनकी पार्टी को चुनावों में जीत दिलाने के लिए हाथ जोड़े, सर झुकाए सब से विनती करते रहे ......


उन महात्मा के लिए दिल से श्रद्धाभाव उमड़ा और चंद क़सीदे उनकी शान में उपजे..... आप भी इस महात्मा के गुण गायें ...


पीटिये सर अभी मैं ज़िन्दा हूँ
औ ख़ुदा रक्खे ख़ूब चंगा हूँ


आप की चाकरी के चक्कर में
आज दिल्ली तो कल भटिंडा हूँ


मुल्क़ की बेहतरी के रस्ते से
जो न हट पाए वो अडंगा हूँ


हो वो मंदिर कि दूसरा मुद्दा
दोनों ही सूरतों में दंगा हूँ


दिल हुआ ग्लैड मैम जब बोलीं
हूँ मैं कमज़र्फ़ मैं लफंगा हूँ


और मुझे यक़ीन है ये गाना भी माननीय नेता जी को बेहद पसंद होगा ..... सो उन के लिए .....


7 comments:

शिवम् मिश्रा said...

बहुत खूब अमिताभ भाई ... लगे रहिये !

kshama said...

Kaash,is karare vyang kaa chaanta netaji ke moohpe lag sake!

Rahul Singh said...

हमारे बहुमत समाज का लगभग प्रतिनिधित्‍व करते हैं ये नेता.

डॉ. मनोज मिश्र said...

पीटिये सर अभी मैं ज़िन्दा हूँ
औ ख़ुदा रक्खे ख़ूब चंगा हूँ
आप की चाकरी के चक्कर में
आज दिल्ली तो कल भटिंडा हूँ..
वाह,बहुत बढ़िया.

प्रवीण पाण्डेय said...

लोकतन्त्र के उत्सव की शुभकामनायें आपको।

क्रिएटिव मंच-Creative Manch said...

जनता की तकलीफ़ से इन्हें कोई ख़ास मतलब नहीं होता .... ये तो देश की सेवा में लगे रहते हैं.

मुल्क़ की बेहतरी के रस्ते से
जो न हट पाए वो अडंगा हूँ

बहुत खूब ... बेहतरीन कटाक्ष
आनंद आ गया आपकी पोस्ट पढ़कर
हार्दिक बधाई / आभार

vijaymaudgill said...

bahut khoob amitabh ji. vaise har jagah "aadarinya neta ji" aise hi hote hain chahe vo delhi ho ya bathinda.