Thursday, November 12, 2009

तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी .... "तलत"









बस तीन शेर "मीर" के ...... और एक पसंद का गीत "तलत" की आवाज़ में ......


"हम ने भी नज़्र की है कि फिरिए चमन के गिर्द
यारब ! चमन के छूटने तक बाल-ओ-पर रहें !!"


"वजह-ए-बेगानगी नहीं मालूम
तुम जहां के हो, वां के हम भी हैं"


"रहा था देख उधर 'मीर' चलते
अजब इक नाउमीदी थी नज़र में"



तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी .... "तलत"






12 comments:

Udan Tashtari said...

उफ्फ, क्या शेर और क्या गीत...छा गये!

"अर्श" said...

kamaal ki aawaz aur uspar khubsurati se gaya gayaa ... is geet ko sunwaane ke liye dil se shukriyaa...



arsh

दिगम्बर नासवा said...

LAJAWAAB SHER AUR TALAT KI AAWAAZ.....SAMA BANDH GAYA .....

vimal verma said...

अमिताभ भाई, आपकी पसन्द के हम पहले से ही कायल है....वाकई आप छा गये

रश्मि प्रभा... said...

गीत बहुत ही बढिया और आपका लिखा.... पुराने गीतों में एक अलग-सी बात

नीरज गोस्वामी said...

बेहतरीन...तलत मुझे बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत पसंद है...शुक्रिया ...और मीर के शेर...सुभान अल्लाह..
नीरज

Mrs. Asha Joglekar said...

वजहे बेगानगी नही मालूम
जहां के तुम हो हम भी वहीं के है ।
बहुत सुंदर और गीत के तो क्या कहने । आपकी पसंद
बहुत अच्छी लगी ।

MUFLIS said...

"aaraam wo kyaa degi,
jo tarhpaa na sakegii....."

huzoor....
aapne bahut bahut barhaa karam
kiyaa jo aisaa nayaab aur km-suna-jane-wala geet sunvaa kr dili sukoon bakhsh diyaa hai...
s h u k r i y a a !!

शरद कोकास said...

वाह साहब इधर मीर और उधर तलत ... जान लेंगे क्या हमारी?

Devi Nangrani said...

Bine kahe lafaaz bol uthe
bahut khoob!!!

Devi Nangrani

indu said...

जहाँ तक मेरा ख्याल है ये ग़ज़ल मीर kee nahi बल्कि
फैयाज़ हाश्मी की है ,पता लगाए...
तलत महमूदजी ने अपनी मखमली आवाज़ मे
बहूत सुंदर गाया है ,कोई शक नही

indu said...

जहाँ तक मेरा ख्याल है ये ग़ज़ल मीर किन्ही बल्कि
फैयाज़ हाश्मी की है ,पता लगाए...
तलत महमूदजी ने अपनी मखमली आवाज़ मे
बहूत सुंदर गाया है ,कोई शक नही