Sunday, July 19, 2009

"सपने में सजन से दो बातें" : मदनमोहन - २









पिछली पोस्ट से आगे


मदनमोहन सेना में भरती तो हो गए, लेकिन मन नहीं लगा. सो कुछ ही समय में सेना छोड़ ऑल इंडिया रेडियो लखनऊ में नौकरी की. वहाँ उन्हें उस्ताद फैयाज़ खां, उस्ताद अली अकबर खां, बेग़म अख्तर और तलत महमूद जैसी, उस ज़माने की जानी मानी हस्तियों के साथ काम करने का मौक़ा मिला.


फिर वो बम्बई आ गए ...... मज़े की बात ये है कि मदनमोहन बम्बई आये थे ऐक्टर बनने ....


बहरहाल कुछ दिनों तक सचिन देव बर्मन और श्याम सुन्दर के साथ काम किया. १९५० में उन्हें फिल्म "आँखें" में संगीत देने का मौक़ा मिला, और फिर आई फिल्म "अदा", जिस के साथ एक अमर जोड़ी बनी .... "लता - मदनमोहन".


"अदा" के कुछ गीत बहुत मक़बूल हुए, मसलन :


"प्रीतम मेरी दुनियाँ में दो दिन तो रहे होते", "आँखों आँखों में उन से प्यार हो गया" और "सांवरी सूरत मन भाई रे पिया"


बाकी बातें अगली बार ..... आज फ़िल्म "अदा" के इसी गीत से शुरू करते हैं ....


सांवरी सूरत मन भाई रे पिया ....
फ़िल्म : अदा (१९५१)
गीत : प्रेम धवन
आवाज़ : लता




सजना लगन तेरी सोने न दे ......
फ़िल्म : दुनियाँ न माने (१९५९)
गीत : राजेंद्र कृष्ण
आवाज़ : लता




सपने में सजन से दो बातें.........
फ़िल्म : Gateway of India (१९५९)
गीत : राजेंद्र कृष्ण
आवाज़ : लता

12 comments:

अफलातून said...

हिंदी में यह दस्तावेजीकरण बहुत जरूरी है । गीतों का चयन तो अद्भुत होना ही है ।

डॉ. मनोज मिश्र said...

bahut sundr,aabhaar.

जितेन्द़ भगत said...

संदर्भ के साथ संगीत सुनने का मजा ही कुछ और है। आपका शुक्रि‍या।

PN Subramanian said...

हम तो उनके दीवाने हैं. आज सुबह ही हमने एक सीडी बनाकर एक मित्र को दी है. "सपने में सजन से दो बातें" को हमने बहुत दिनों से नहीं सुना था तो हमें उसका अवसर भी अप्प की पोस्ट के नाध्यम से प्राप्त हो गया. आभार.

Ashok Pande said...

अफ़लातून जी की बातों से सौ फ़ीसदी सहमत. दस्तावेज़ीकरण और चयन दोनों बातों पर.

अमिताभ भाई, ज़रा जल्दी जल्दी आ कर तबीयत ठीक कर जाया करें.

Nirmla Kapila said...

बहुत ही नायाब गीत सपने से सजन से दो बातें जवाब नहीं आपकी पसंद का धन्यवाद्

महेन्द्र मिश्र said...

आपने तो बहुत पुराने गाने का जिक्र किया है जो मेरे जन्म से भी पहले का है . प्रस्तुति के लिए आभार.

readerscamp said...

very informative

दिलीप कवठेकर said...

ये गीत अब धरोहर हैं.

६० - ७० सालों के बाद भी एव्हर ग्रीन हैं.

धन्यवाद,

दिगम्बर नासवा said...

बस इतना ही kahungaa....... लाजवाब

Vidhu said...

मीत जी ,मदन मोहन जी पर जानकारी थोडी बहुत तो थी लेकिन इसमें थोडा इजाफा कर दिया आपने....प्रीतम मेरी दुनिया मैं दो दिन तो रहे होते ...वाकई कमाल का गीत है,उर मई रे मैं कासे कहूं ....मदन जी की आवाज मैं बेहतरीन है आपका..आभार

Murari Pareek said...

बहुत सुन्दर जानकारी दी मदन मोहन जी की ! धन्यवाद !!