दोस्तो आज एक बहुत ही खूबसूरत गीत सुनिए "जगमोहन" की आवाज़ में. इस आवाज़ का जादू भी कमाल है. कविता में जान दाल देती है. आवाज़ की रवानी का जवाब नहीं. ये गीत तो भी लाजवाब है ही, जगमोहन की आवाज़ में तो बस .... कुछ न पूछें.
मेरी आँखें बनीं दीवानी
पहले लाईं आग ह्रिदय में
फिर भर लाईं पानी
मेरी आँखें बनीं दीवानी
मन का साथी सब कुछ ले कर
बिछड़ गया बिछड़ गया बिछड़ गया है दर्द को दे कर
नींद के बदले याद है आती
नींद के बदले याद है आती भूली हुई कहानी
मेरी आँखें बनीं दीवानी
अपने को खो कर क्या पाया
दुख को अपना मित्र बनाया
इस पर भी न भुला सका इस दिल से याद पुरानी
आँखें
मेरी आँखें बनीं दीवानी
जिस महफ़िल में था एक मेला
उस में आख़िर रहा अकेला
मरते दम तक सूने पन की
मरते दम तक सूनेपन की करूँगा मैं मेहमानी
मेरी आँखें बनीं दीवानी
मेरी आँखें बनीं दीवानी
Courtesy of : 'The Gramophone Company of India'
Four Songs : my Choice 7
1 week ago









9 comments:
मीतजी मन की प्रीत का गीत जोड़ा आपने.
मज़ा आ गया.
amazing!
bahut madhur,geet,aawaz,bol alfaz,superb
बहुत बुरी बात है मीतजी..
सुबह सुबह इतना मधुर गीत सुनवा दिया। अब दिन भर यही गीत दिलो दिमाग पर छाया रहेगा...
By the way .. चौथी बार सुनते हुए टिप्पणी कर रहा हूँ।
Meetbhai
One of my faVORITE SONGS. i HAVE MORE ON MY HARD DISC. sHALL i SEND THEM TO U TO SHARE WITH YOUR BLOG LOVERS?
-HARSHAD JANGLA
ATLANTA, USA
मीत जी, कुछ साल पहले तक मैं भी गीत लिखता था...लेकिन आपके गीतों को पढ़ कर फिर से लिखने का मन कर रहा है। कोशिश करूंगा। बस अंत में... आपके ब्लॉग को देखकर "मेरी आँखे बनीं दीवानी " हां हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया।
बहुत मधुर गीत ,मज़ा आ गया!
लाजवाब गीत। मज़ा आ गया।
एक बात और भाई। ये जो आपने लगा रखा है 'अपनी भाषा में पढ़ें'इसका html कोड मिल सकता है मुझे? अगर उपलब्ध करा दें, तो खुशी होगी।
जिस महफ़िल में था एक मेला
उस में आख़िर रहा अकेला
मरते दम तक सूने पन की
मरते दम तक सूनेपन की करूँगा मैं मेहमानी
बहुत खुब,
मीत जी इस कविता को मेने काफ़ी बार सुना, हर बार अलग लगा,
आप को ओर आप के परिवार कॊ होली की बहुत बहुत बधाई
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