
बस तीन शेर "मीर" के ...... और एक पसंद का गीत "तलत" की आवाज़ में ......
"हम ने भी नज़्र की है कि फिरिए चमन के गिर्द
यारब ! चमन के छूटने तक बाल-ओ-पर रहें !!"
"वजह-ए-बेगानगी नहीं मालूम
तुम जहां के हो, वां के हम भी हैं"
"रहा था देख उधर 'मीर' चलते
अजब इक नाउमीदी थी नज़र में"
तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी .... "तलत"
















